लखनऊ। साक्षर भारत मिशन के अंतर्गत कार्यरत शिक्षा प्रेरकों के बकाया मानदेय का भुगतान न होने से आक्रोशित साक्षरता कल्याण समिति, उत्तर प्रदेश ने शासन और विभाग के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। समिति के प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान वर्मा ने साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा के निदेशक को पत्र सौंपकर अल्टीमेटम दिया है कि यदि 28 अक्टूबर तक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) के खातों में धनराशि नहीं भेजी गई, तो 29 अक्टूबर 2026 से विभागीय कार्यालय के समक्ष आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। मांग पूरी न होने पर संगठन ने आत्मदाह तक की चेतावनी दी है।

क्या है पूरा मामला?
साक्षरता कल्याण समिति द्वारा निदेशक को भेजे गए आधिकारिक पत्र के अनुसार, साक्षर भारत मिशन के तहत काम करने वाले प्रेरकों के लंबे समय से लंबित बकाया मानदेय के भुगतान के लिए राज्य सरकार द्वारा बजट जारी किया जा चुका है। विभागीय स्तर पर आगामी भुगतान के लिए 22 अक्टूबर 2026 को ही पत्रावली (फाइल) कोषागार (ट्रेजरी) को भेज दी गई थी। इसके बावजूद, कोषागार से अभी तक यह धनराशि जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों के खातों में ट्रांसफर नहीं की गई है, जिससे प्रदेश भर के हजारों प्रेरकों में भारी निराशा और आक्रोश है।
28 अक्टूबर तक की दी समयसीमा
समिति के प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान वर्मा ने साफ किया है कि बजट मिलने और फाइल बढ़ने के बाद भी विभागीय और प्रशासनिक शिथिलता के कारण भुगतान अटका हुआ है। संगठन ने चेतावनी दी है कि कल, यानी 28 अक्टूबर 2026 तक हर हाल में मानदेय की राशि जिला स्तर पर भेज दी जाए।
उग्र आंदोलन की रूपरेखा: आमरण अनशन और आत्मदाह की चेतावनी
पत्र में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर खातों में पैसा नहीं पहुंचता है, तो 29 अक्टूबर से लखनऊ स्थित निदेशक कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया जाएगा। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति गंभीर होती है, तो पीड़ित प्रेरक आत्मदाह जैसा आत्मघाती कदम उठाने के लिए भी मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी साक्षरता विभाग के अधिकारियों और शासन-प्रशासन की होगी। इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर भी ‘प्रेरक संगठन जिंदाबाद’ के नारों के साथ इस आंदोलन को लेकर लामबंदी तेज हो गई है।