वार्षिक ऋण योजना के तहत सितंबर तक 3,532 करोड़ रुपये का ऋण वितरित, युवाओं और किसानों को प्राथमिकता देने पर जोर
हिन्द सन्देश टाइम्स | महराजगंज जनपद में बैंकिंग गतिविधियों को गति देने, पात्र लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय पुनरीक्षण समिति (डीएलआरसी) एवं जिला परामर्शदात्री समिति (डीसीसी) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में वार्षिक ऋण योजना, कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान तथा केंद्र एवं प्रदेश सरकार की विभिन्न ऋण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
बैठक में अग्रणी जिला प्रबंधक भूपेन्द्र मिश्रा ने बैंकिंग गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि सितंबर 2026 में जनपद का ऋण-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) बढ़कर 73 प्रतिशत हो गया है, जबकि जून में यह 72.63 प्रतिशत था। यह भारतीय रिजर्व बैंक के निर्धारित 60 प्रतिशत मानक और प्रदेश के औसत 55.97 प्रतिशत से अधिक है। सितंबर 2026 तक जनपद के बैंकों में कुल 9,823.70 करोड़ रुपये जमा हुए, जबकि 7,171.19 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया।
वार्षिक ऋण योजना के लक्ष्य पूरे करने पर जोर
वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक ऋण योजना के तहत सितंबर 2026 तक 8,039.90 करोड़ रुपये के लक्ष्य के सापेक्ष 3,532.07 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया है। यह निर्धारित लक्ष्य का 43.93 प्रतिशत है। इसमें कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों के लिए 1,270.93 करोड़ रुपये तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में 1,339.61 करोड़ रुपये का ऋण वितरण शामिल है।
मुख्य विकास अधिकारी ने बैंक अधिकारियों को निर्देश दिया कि कृषि, एमएसएमई सहित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में पात्र लाभार्थियों को अधिकाधिक ऋण उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने वार्षिक ऋण योजना के लक्ष्यों की शत-प्रतिशत प्राप्ति के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी कार्रवाई करने पर जोर दिया।
युवाओं के लंबित ऋण आवेदनों का समय से करें निस्तारण
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जनपद में अब तक 605 लाभार्थियों को ऋण वितरित किया जा चुका है। इस पर मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश दिया कि पात्र युवाओं के आवेदन अनावश्यक रूप से लंबित न रखे जाएं तथा निर्धारित समय-सीमा में ऋण स्वीकृति और वितरण सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने संबंधित विभागों एवं बैंक अधिकारियों को आपसी समन्वय से युवाओं को स्वरोजगार अपनाने और नए उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा, ताकि रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ जनपद की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सके।
किसानों को केसीसी से जोड़ने पर विशेष जोर
कृषि ऋण की समीक्षा करते हुए छोटे एवं सीमांत किसानों को संस्थागत ऋण सुविधा उपलब्ध कराने तथा किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से अधिकाधिक किसानों को लाभान्वित करने पर जोर दिया गया। बैठक में बताया गया कि पशुपालन क्षेत्र में 6,252 किसान क्रेडिट कार्ड खातों के माध्यम से 82.89 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया है। वहीं, मत्स्यपालन क्षेत्र में 150 लाभार्थियों को ऋण उपलब्ध कराया गया है।
मुख्य विकास अधिकारी ने कृषि एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों को बैंकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और पात्र किसानों की पत्रावलियां समय से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की कमी या विभागीय समन्वय के अभाव में ऋण स्वीकृति एवं वितरण में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
ग्राम पंचायतों में लगेंगे वित्तीय समावेशन शिविर
भारत सरकार की ओर से 21 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक संचालित वित्तीय समावेशन संतृप्ति अभियान की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि अभियान के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में शिविर आयोजित कर पात्र व्यक्तियों को प्रधानमंत्री जनधन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना तथा अटल पेंशन योजना से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही निष्क्रिय जनधन खातों की री-केवाईसी भी कराई जाएगी।
मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित विभागों और बैंक शाखाओं को अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने तथा पात्र व्यक्तियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।
कई अन्य योजनाओं की भी हुई समीक्षा
बैठक में एनपीए एवं ऋण वसूली, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों को वित्तीय सहायता, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री स्वनिधि, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, कृषि अवसंरचना निधि, पीएमएफएमई, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम तथा ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
सीडीओ ने लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण करने और सभी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचना चाहिए। ऋण वितरण, वित्तीय समावेशन और स्वरोजगार सृजन के लक्ष्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के लिए बैंक एवं विभागीय अधिकारी मिलकर कार्य करें।
बैठक में अग्रणी जिला प्रबंधक भूपेन्द्र मिश्रा, भारतीय रिजर्व बैंक के एजीएम सुधीर पाण्डेय, नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक विवेक तिवारी, उपायुक्त उद्योग नीरज सिंह, उप कृषि निदेशक संजीव कुमार, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एजाज, जिला मिशन प्रबंधक एवं उपायुक्त स्वतः रोजगार मोहम्मद जाकिर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा जनपद के बैंकों के जिला समन्वयक उपस्थित रहे।