रामपुर बलडीहा गांव का मामला, शिकायतकर्ता ने कहा—पूर्वाग्रह से ग्रसित है रिपोर्ट
घुघली/महराजगंज: विकास खण्ड घुघली क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सभा रामपुर बलडीहा में ग्रामवासी मदन मुरारी चौबे ने बीडीओ को पत्र देकर आरोप लगाया है कि आईजीआरएस संख्या 91528700004170 का निस्तारण बिना किसी गुणवत्ता जांच के ही फर्जी तरीके से निस्तारित कर रिपोर्ट लगाई गई है। शिकायत करता ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्यवाही की मांग की है।
गुणवत्ता जांच के नाम पर दिखावा
मदन मुरारी चौबे ने आरोप लगाया कि गांव में हुए इंटरलॉकिंग ,नाली इत्यादि के गुणवत्ता की जांच की मांग पर उन्होंने एक आवेदन दिया था। इस पर बीडीओ द्वारा आईजीआरएस के तहत कार्यवाही की करते हुए 4 अप्रैल को एक जांच टीम गठित कर दी गई, जिसमें दोपहर 2 बजे टीम गांव पहुंची।
जांच के नाम पर खानापूर्ति
शिकायतकर्ता के अनुसार, टीम में शामिल जांच अधिकारी ने शिकायतकर्ता को दूरभाष के माध्यम से जांच स्थल पर बुलाया गया वहां शिकायतकर्ता ने ईंट उजड़कर नीचे RCC रोड है जांच किया जाए तथा इंटरलॉकिंग ईंट की गुणवत्ता की जांच की जाय त्यों ही रोजगार सेवक राहुल गुप्ता व उनके सहयोगियों ने शिकायतकर्ता से उलझ गए और शिकायतकर्ता को मारने के लिए दौड़ाये वहां से शिकायतकर्ता भाग गया और 112 नंबर डायल कर पुलिस को बुलाया तब तक सब अधिकारी फरार हो चुके थे तो शिकायतकर्ता के सामने कोई जांच नहीं हुआ तथा संतोष जनक रिपोर्ट तैयार की और उसे ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कर दिया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पक्ष में रहने के कारण रोजगार सेवक के सहयोगियों से हस्ताक्षर भी कराया गया है कि कार्य संतोष जनक हुआ है
मारपीट और धमकी का आरोप, पुलिस को दी सूचना
शिकायतकर्ता ने 5/4/2025को घुघली थाने पर शिकायत दिया जिसमें 6/4/2025को घुघली थाने पर बुलाया गया वहां नामजद में एक आरोपी सुरेन्द्र यादव कों छोड़ते हुए शिकायतकर्ता और रोजगार सेवक राहुल गुप्ता को शांति भंग की धारा में चालान कर दिया गया
जांच अधिकारी और रोजगार सेवक पर पक्षपात का आरोप
शिकायतकर्ता ने बताया कि जिस रोजगार सेवक द्वारा कराए गए कार्य में अनियमितता पाई गई है उसी को जांच रिपोर्ट में गवाह के रूप में हस्ताक्षर कराया गया है और खुद को निर्दोष घोषित करवा लिया। इतना ही नहीं, IGRS में स्पेशल क्लोजर निस्तारण कर दिया गया है
पुनः जांच कराने की मांग
मदन मुरारी चौबे ने कहा है कि पूर्वाग्रह से ग्रसित जांच में वास्तविकता दबा दी गई है। उन्होंने मांग की है कि बीडीओ द्वारा गठित दूसरी निष्पक्ष टीम से गुणवत्ता की दोबारा जांच कराई जाए। साथ ही दोषी अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाए।