सिसवा नगर।
“जहाँ कथा श्रीमद् भागवत की सुनाई जाती है,
वहाँ स्वयं भगवान भक्तों के बीच विराजते हैं।”
सिसवा नगर के सिल्वर फीनिक्स अतिथि भवन में चल रही श्रीमद् भागवत कथा का वातावरण भक्ति रस से सराबोर रहा। कथा के पांचवे दिन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे जब कथावाचक श्री मिथलेश पाण्डेय उर्फ सिद्धि बाबा ने भक्त प्रह्लाद और जड़ भरत जी की कथा का मनमोहन वर्णन किया।
सिद्धि बाबा ने बताया कि भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे। राक्षस कुल में जन्म लेने के बावजूद उनका हृदय विष्णु भक्ति में रमा रहा। पिता हिरण्यकश्यप ने भक्ति से रोकने के अनेक प्रयास किए, यहाँ तक कि प्रह्लाद को मारने की योजनाएँ रचीं, किंतु हर बार भगवान विष्णु अपने भक्त की ढाल बने। अंततः नरसिंह अवतार धारण कर भगवान ने हिरण्यकश्यप का संहार कर प्रह्लाद की भक्ति की रक्षा की। कथा सुनते ही श्रोतागण “जय श्री नारायण” के उद्घोष से गूंज उठे।
इसके उपरांत जड़ भरत जी की कथा का प्रसंग सुनाते हुए सिद्धि बाबा ने बताया कि पूर्व जन्म में राजा भरत गृह त्याग कर तपस्या में लीन हुए। किंतु मृग शावक के मोह में तपस्या अधूरी रह गई और मृग वियोग में उन्होंने प्राण त्याग दिए। अगले जन्म में मंदबुद्धि कहलाने के बावजूद उन्होंने भगवान की भक्ति का आश्रय लिया और अंततः मुक्ति प्राप्त की। यह कथा श्रद्धालुओं के हृदय को गहराई से स्पर्श कर गई।
भक्ति रस से ओतप्रोत इस आयोजन में राकेश पाण्डेय, गिरीश पाण्डेय, प्रमोद जायसवाल, दिनेश सोनी, प्रमोद मद्धेशिया, योगेश जायसवाल, गिरधारी केडिया, विजय, प्रेम, घनश्याम सहित अनेक भक्तगण उपस्थिति रहे। वातावरण “हरि नाम संकीर्तन” से गुंजायमान हो उठा।
“हरि भक्ति से जीवन का हर दुख मिट जाता है,
जिसने हरि नाम जपा, उसका भवसागर तर जाता है।”