झाड़ियों में घिरा मछलीगांव पीएचसी, बदहाली से मरीज परेशान

उत्तर प्रदेश गोरखपुर

गोरखपुर जनपद के कैम्पियरगंज क्षेत्र के मछलीगांव बरगदही स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पूरी तरह अव्यवस्था का शिकार है। 2014-15 में करोड़ों की लागत से निर्मित यह अस्पताल आज खंडहर में तब्दील होता दिख रहा है। अस्पताल परिसर में चारों तरफ घास-फूस और झाड़ियां उगी हुई हैं, जिससे मरीजों और आम जनता का आना-जाना मुश्किल हो गया है। इमारत की दीवारों से पानी टपक रहा है, कई जगहों पर ताले जड़े रहते हैं, वहीं पंखे खराब पड़े हैं और शुद्ध पेयजल की भी कोई व्यवस्था नहीं है।

सबसे गंभीर समस्या डॉक्टरों और स्टाफ की कमी है। अस्पताल में न तो नियमित चिकित्सक तैनात हैं और न ही सफाईकर्मी। नतीजतन, आसपास के गांवों से आने वाले मरीजों को इलाज के लिए निजी क्लीनिकों या दूर-दराज के अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों की शिकायत पर कैम्पियरगंज क्षेत्र के भावी जिला पंचायत सदस्य अजय नायक स्वयं अस्पताल पहुंचे और अव्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने देखा कि अस्पताल में गंदगी और तालेबंदी आम बात है। कर्मचारियों से जब सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल किया गया, तो उन्हें बताया गया कि सफाईकर्मी महीनों से नहीं आते और डॉक्टरों की नियुक्ति ही नहीं है।

इसके बाद अजय नायक ने गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को फोन कर पीएचसी की बदहाली और जनता की समस्याओं से अवगत कराया। सीएमओ ने डॉक्टरों की कमी स्वीकार करते हुए जल्द समाधान का आश्वासन दिया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो इस पीएचसी के निर्माण का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा और ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रहना पड़ेगा।

अस्पताल की मौजूदा स्थिति-
आज यह अस्पताल बदहाली की कगार पर है।
चारों तरफ झाड़ियां और घास-फूस का अंबार लगा है।
इमारत से पानी टपक रहा है और जगह-जगह दीवारें जर्जर हो चुकी हैं।

अस्पताल में पंखे खराब पड़े हैं।
शुद्ध पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है।
दवाखाने के अलावा अधिकांश कमरों पर ताले लगे रहते हैं।

डॉक्टरों और स्टाफ की कमी-
अस्पताल में किसी भी डॉक्टर की नियमित तैनाती नहीं है।
सफाईकर्मी महीनों से नहीं आते, जिसके चलते परिसर गंदगी से भरा पड़ा है।
नर्स और अन्य मेडिकल स्टाफ की भी भारी कमी है।

स्थानीय प्रतिनिधि की पहल-
हाल ही में मछलीगांव के भावी जिला पंचायत सदस्य अजय नायक को स्थिति की जानकारी मिली।
वे स्वयं अस्पताल पहुंचे और अव्यवस्था अपनी आंखों से देखी।
कर्मचारियों से बातचीत करने पर उन्हें बताया गया कि न तो सफाईकर्मी आते हैं और न ही डॉक्टरों की नियुक्ति हुई है।

शिकायत और प्रशासन की प्रतिक्रिया-

अजय नायक ने गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को फोन कर पूरा मामला बताया।
सीएमओ ने डॉक्टरों की कमी स्वीकार की और आश्वासन दिया कि जल्द ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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