“आईडियाज मैटर मोस्ट” ने आईआईटी रुड़की में जगाई राष्ट्र निर्माण की अलख, इसरो अंतरिक्ष यात्री व निदेशक प्रो. के.के. पंत ने साझा किए प्रेरक विचार

उत्तर प्रदेश रुड़की

विकसित भारत 2047 के विजन पर केंद्रित रहा प्रतिष्ठित टॉक शो, देशभर के शिक्षाविदों व उद्योग विशेषज्ञों ने रखा


रुड़की। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की का ऐतिहासिक परिसर शुक्रवार को प्रेरणा और नवाचार का केंद्र बन गया, जब यहां देश के सबसे प्रतिष्ठित विचार नेतृत्व कार्यक्रम “आइडियाज मैटर मोस्ट” का आयोजन हुआ। यह कार्यक्रम एमडीएस इंडोकैन के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने की दिशा में संवाद को प्रोत्साहित करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत के उद्घाटन भाषण से हुआ। उन्होंने शिक्षा, नवाचार और सामाजिक प्रगति के बीच तालमेल स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने युवाओं से सीमाओं से परे सोचने और भारत की विकास यात्रा में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि के रूप में इसरो के अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अपने प्रेरक उद्बोधन से विद्यार्थियों और शिक्षकों को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने भारतीय वायु सेना से इसरो तक की अपनी प्रेरक यात्रा साझा करते हुए युवाओं से कहा कि वे जुनून, अनुशासन और उद्देश्यपूर्ण जीवन के साथ अपने सपनों को साकार करें।



कार्यक्रम में डॉ. सुवरोकमल दत्ता (अंतरराष्ट्रीय रूढ़िवादी राजनीतिक, आर्थिक एवं विदेश नीति विशेषज्ञ), प्रो. भोला राम गुर्जर (निदेशक, NITTTR चंडीगढ़), डॉ. दिनेश शाहरा (संस्थापक, दिनेश शाहरा फाउंडेशन), डॉ. आनंद हांडा (मुख्य रणनीति अधिकारी, C3iHub, IIT कानपुर), अंकुश तिवारी (संस्थापक एवं CEO, Pi-Labs), अशोक श्रीवास्तव (वरिष्ठ संपादक एवं एंकर, DD News), कौशिक केथाराम (संस्थापक, Intelly-360 Wealth) और डॉ. फलाद्रम शर्मा (परियोजना अधिकारी, IIT गुवाहाटी) जैसे प्रतिष्ठित वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए।

केंद्रीय विषय “आत्मनिर्भर भारत: विकसित भारत 2047 की ओर एक रोडमैप” पर सभी सत्र केंद्रित रहे। संवादों में शिक्षा, नीति और उद्योग जगत की महत्वपूर्ण भागीदारी रही, जिसने भारत के विचारकों, कर्ताओं और स्वप्नदर्शियों को एक साझा मंच पर जोड़ने का कार्य किया।

कार्यक्रम के अंत में यह संदेश गूंजता रहा कि “आइडियाज मैटर मोस्ट” जैसे आयोजन न केवल विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देते हैं, बल्कि नवाचार, संवाद और राष्ट्र निर्माण के नए युग की नींव भी रखते हैं। आईआईटी रुड़की ने इस आयोजन के माध्यम से एक बार फिर यह साबित किया कि वह देश के बौद्धिक और तकनीकी विकास में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

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