लेख:
नई दिल्ली — हाल ही में जारी वैश्विक भ्रष्टाचार सूचकांक में भारत को 96वां स्थान प्राप्त हुआ है। यह रैंकिंग दर्शाती है कि भ्रष्टाचार अभी भी देश की व्यवस्था और आम जनता के जीवन में गहराई से जड़ें जमाए हुए है।
दुनिया के सबसे कम भ्रष्ट देशों में डेनमार्क, फिनलैंड, सिंगापुर, न्यूजीलैंड और लक्ज़मबर्ग शामिल हैं। वहीं सबसे अधिक भ्रष्ट देशों की सूची में दक्षिणी सूडान, सोमालिया, वेनेजुएला और सीरिया शीर्ष पर हैं।
भारत की आंतरिक रिपोर्ट (NCIB) के अनुसार, देश के सबसे भ्रष्ट विभागों में पुलिस विभाग पहले स्थान पर है। इसके बाद राजस्व विभाग, नगर निगम/नगर पालिका, बिजली विभाग, सड़क परिवहन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, आवास एवं शहरी विकास विभाग, आयकर व GST विभाग, और वन विभाग का नाम आता है।
यह स्थिति दर्शाती है कि भ्रष्टाचार केवल आर्थिक लेनदेन तक सीमित नहीं, बल्कि यह व्यवस्था में गहराई तक फैला हुआ है। छोटे कार्यों से लेकर बड़े प्रशासनिक फैसलों तक रिश्वतखोरी और अनुचित लाभ लेने की प्रवृत्ति आम हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इस रैंकिंग में सुधार लाने के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और डिजिटल प्रणाली को और सशक्त बनाना होगा। सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन लाने, लोकसेवकों की जवाबदेही तय करने और नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकता है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता, ईमानदारी और कठोर कार्रवाई ही वह रास्ता है जिससे भारत न केवल अपनी रैंकिंग सुधार सकता है, बल्कि एक न्यायपूर्ण और पारदर्शी शासन व्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।