नई दिल्ली। संसद से पारित ऑनलाइन गेमिंग विधेयक, 2025 ने रियल-मनी गेमिंग कंपनियों पर कड़ा शिकंजा कस दिया है। अब कानून का उल्लंघन कर मनी-गेमिंग सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियों पर तीन साल तक की जेल और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। यदि कोई कंपनी बार-बार नियम तोड़ेगी तो यह सज़ा पांच साल की जेल और दो करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकती है।
विज्ञापन और प्रचार पर भी सख्ती
नए कानून के तहत, ऑनलाइन मनी गेमिंग का विज्ञापन करने या प्रचारित करने वालों पर भी गाज गिरेगी। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वालों को दो साल तक की कैद और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
लेन-देन करने वाले भी आएंगे दायरे में
केवल गेमिंग कंपनियां ही नहीं, बल्कि रियल-मनी गेमिंग से जुड़े किसी भी प्रकार के लेन-देन (जैसे भुगतान गेटवे, एजेंट या अन्य संस्थाएं) में शामिल लोग भी इस कानून के तहत दंडित किए जा सकेंगे।
राष्ट्रीय ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी का गठन
बिल के तहत एक राष्ट्रीय ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी का गठन किया जाएगा। यह अथॉरिटी सभी ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स की निगरानी करेगी और सुनिश्चित करेगी कि कोई भी कंपनी कानून का उल्लंघन न कर सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कड़े प्रावधान से युवाओं को मनी गेमिंग और जुए जैसी प्रवृत्तियों से बचाने में मदद मिलेगी, साथ ही परिवारों पर आर्थिक बोझ भी घटेगा।