महराजगंज, मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। ठंड–गर्मी के उतार-चढ़ाव के बीच इन दिनों जोड़ दर्द, सियाटिका, एलर्जी, खांसी, दमा, पेट से जुड़ी समस्याएँ और चर्म रोग तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। खासतौर पर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों में इन बीमारियों की शिकायत अधिक देखने को मिल रही है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।
होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. श्याम मोहन श्रीवास्तव का कहना है कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग त्वरित राहत के लिए दवाइयाँ तो ले लेते हैं, लेकिन बीमारी की जड़ पर ध्यान नहीं देते। उन्होंने बताया कि “होम्योपैथी में रोग के लक्षण ही नहीं, बल्कि उसके मूल कारण को पहचानकर इलाज किया जाता है। इसमें आराम भले ही थोड़ा देर से मिले, लेकिन वह स्थायी और बिना साइड इफेक्ट के होता है।”
जोड़ दर्द और सियाटिका में विशेष लाभ,ठंड के मौसम में नसों में खिंचाव और सूजन के कारण जोड़ दर्द और सियाटिका की समस्या बढ़ जाती है। कई लोग लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं पर निर्भर हो जाते हैं, जिससे अन्य दुष्प्रभाव सामने आते हैं। डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार, होम्योपैथिक उपचार से नसों की कमजोरी दूर करने, सूजन कम करने और शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है।
बच्चों और महिलाओं में बढ़ रही समस्याएँ,
बच्चों में बार-बार सर्दी–खांसी, टॉन्सिल की समस्या और इम्युनिटी की कमी आम होती जा रही है। वहीं महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन, कमजोरी, थकान और जोड़ों के दर्द की शिकायत बढ़ रही है। ऐसे में होम्योपैथी को एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प माना जा रहा है, जो शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना धीरे-धीरे सुधार लाती है।
सही समय पर इलाज है जरूरी
चिकित्सकों का मानना है कि यदि बीमारी को शुरुआती अवस्था में ही गंभीरता से लिया जाए और सही उपचार शुरू किया जाए, तो लंबे समय तक दवाइयाँ खाने से बचा जा सकता है। इसके साथ ही नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और चिकित्सकीय सलाह का पालन करना भी बेहद आवश्यक है।
अंत में डॉ. श्याम मोहन श्रीवास्तव ने कहा कि “होम्योपैथी का उद्देश्य केवल लक्षणों को दबाना नहीं, बल्कि रोग को जड़ से समाप्त कर व्यक्ति को स्वस्थ जीवन देना है।”
बदलते मौसम में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और समय पर उपचार ही स्वस्थ रहने की कुंजी है।