कानपुर | ब्यूरो डेस्क
उत्तर प्रदेश में अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति के बीच कानपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नरवल थाने में तैनात दरोगा संदीप कुमार पर आरोप है कि उन्होंने एक दहेज उत्पीड़न मामले की जांच के दौरान पीड़ित परिवार से 90 हजार रुपये की अवैध मांग की। रकम न मिलने पर उन्होंने बदले की भावना से 12 लोगों को केस में आरोपी बना दिया।
रिश्वत के बदले राहत का भरोसा
दीपापुर गांव निवासी नेहा ने दहेज प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की जांच संदीप कुमार को सौंपी गई। आरोप है कि जांच के दौरान दरोगा ने परिवार से संपर्क कर कहा कि अगर तय रकम दी जाती है, तो वह केस में दर्ज कुछ नामों को हटवा देंगे और कानूनी कार्रवाई को हल्का कर देंगे।
पैसे नहीं मिले तो बढ़ा दिए आरोपी
परिवार द्वारा रिश्वत देने से इनकार करने पर दरोगा ने कथित तौर पर 12 अतिरिक्त लोगों को मुकदमे में शामिल कर दिया। हैरानी की बात यह रही कि इनमें एक महिला पुलिसकर्मी और आईटीबीपी में तैनात जवान भी शामिल हैं, जिनका इस प्रकरण से कोई सीधा संबंध नहीं बताया जा रहा।
डीसीपी जांच में खुली पोल
पीड़ित महिला के पति रोहित तिवारी ने पूरे मामले की शिकायत डीसीपी पूर्वी से की। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कराई गई विभागीय जांच में संदीप कुमार पर लगे आरोप सही पाए गए। इसके बाद पुलिस आयुक्त ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
पुलिस विभाग का सख्त संदेश
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून की आड़ में गलत काम करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने कहा कि भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस कार्रवाई के बाद पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद जताई है।