वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक महाकुंभ एवं स्मृति सम्मान समारोह कार्यक्रम हुआ संपन्न

उत्तर प्रदेश कुशीनगर



शिव शंभू सिंह

अंतर्राष्ट्रीय भारत -नेपाल साहित्यिक/सांस्कृतिक महाकुंभ एवं स्मृति सम्मान समारोह के अन्तिम दिन काव्य, गीत, ग़ज़ल, मुक्तक के साथ -साथ समूह डमरू वादन, गायन, फिल्म- एलबम कलाकारों के संवाद से सराबोर रहा-
काशी हिन्दी विद्यापीठ द्वारा अंतर्राष्ट्रीय गज़लकार एवं प्रयागराज के पूर्व जिला न्यायाधीश डॉ.  चन्द्रभाल सुकुमार, कर्नल, डॉ. आदि शंकर मिश्र – विद्या – वाचस्पति एवं राष्ट्रीय रामायण मेला भाटापारा, छत्तीसगढ़ के संस्थापक/ अंतर्राष्ट्रीय लोक कलाकार ठाकुर ललित बहादुर सिंह को भारत गौरव विशेष मानद सम्मान से अलंकृत किया गया –
   

वाराणसी महानगर के रामकटोरा के काशी सेवा समिति महामना मालवीय सभागार में काशी हिन्दी विद्यापीठ एवं अखिल भारतीय लेखक कवि कलाकार परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय बहुभाषीय अंतर्राष्ट्रीय भारत -नेपाल साहित्यिक/ सांस्कृतिक महाकुंभ एवं स्मृति सम्मान समारोह में प्रमुख संयोजक/संचालक -कवि इन्द्रजीत तिवारी निर्भीक के देखरेख में काव्य भूषण – डॉ. राम अवतार पाण्डेय एडवोकेट सभापति – काशी सेवा समिति के अध्यक्षता में महाकुंभ के तृतीय दिवस को आकाशवाणी वाराणसी के पूर्व उपनिदेशक डॉ. राजेश कुमार गौतम, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व प्रोफेसर डॉ.- प्रदीप कुमार पाण्डेय एवं सार्जेंट अभिमन्यु पाण्डेय द्वारा संयुक्त रूप से पीत पट्टिका मां भारती के तैल चित्र पर पहनाकर समूह डमरू वादन पूर्वक शुभ उदघाट्न किया गया।
  

तत्पश्चात् काशी हिन्दी विद्यापीठ के कुलाधिपति सुखमंगल सिंह मंगल ने प्रयागराज के पूर्व जिला न्यायाधीश एवं अंतर्राष्ट्रीय गज़लकार डॉ.चन्द्रभाल सुकुमार, कर्नल, डॉ.आदि शंकर मिश्र – विद्या – वाचस्पति एवं राष्ट्रीय रामायण मेला भाटापारा, छत्तीसगढ़ के संस्थापक एवं अंतर्राष्ट्रीय लोक कलाकार ठाकुर ललित सिंह को भारत-गौरव विशेष मानद सम्मान भेंट कर अलंकृत किया।

विद्या -वाचस्पति विशेष मानद सम्मान – सुल्तानपुर के कवि सत्या अंजान एवं कुशीनगर की प्रख्यात कवयित्री आशा शर्मा, कानपुर की कवयित्री निकेता सिंह, पंडित राहुल सांकृत्यायन के वंशज मृत्युंजय त्रिपाठी मलंग, चन्दौली की कवयित्री पूनम गुप्ता पूर्वी को भेंट किया गया।
  

कवि सम्मेलन का शुभारंभ कुशीनगर की प्रख्यात कवयित्री माधुरी मधु के वाणी वन्दना एवं रविन्द्र जैन जी के अनन्य शिष्य राकेश त्रिपाठी द्वारा उज्ज्वल कैलाश से मां धरा पर आयी से श्रोताओं परमानन्द की अनुभूति हुई। कवि सिद्धनाथ शर्मा सिद्ध, राकेश चन्द्र पाठक महाकाल, मृत्युंजय त्रिपाठी मलंग ओमप्रकाश पाण्डेय निर्भय, ओमप्रकाश द्विवेदी ओम्, ईश्वर चन्द्र जायसवाल -मेहदावली, राम-लखन वर्मा -रायबरेली, सत्या अंजान – सुल्तानपुर, चिंतित बनारसी,भजन गायक -अनुज दूबे, नाट्य रंगकर्मी विजय कुमार गुप्ता-दीनदयाल नगर, अंतर्राष्ट्रीय लोक कलाकार ठाकुर ललित सिंह -भाटापारा, छत्तीसगढ़, संगीता श्रीवास्तव, झरना मुखर्जी, कन्हैया दूबे केडी. , दिवाकर पाठक हजारी बाग,गायक राकेश चौबे संगम, रंजीत मिश्रा,सार्जेंट अभिमन्यु पाण्डेय, डॉ.राम अवतार पाण्डेय एडवोकेट सहित अनेकों रचनाकारों, कलाकारों, डमरू वादकों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
  

भारत -नेपाल साहित्यिक/ सांस्कृतिक महाकुंभ स्मृति सम्मान -2026 कन्हैया दूबे केडी.सहित अनेकों लोगों को भेंट किया गया।
   मुख्य अतिथि द्वय प्रोफेसर प्रदीप कुमार पाण्डेय एवं सार्जेंट अभिमन्यु पाण्डेय ने अपने -अपने संबोधन में कहा कि भारत -नेपाल साहित्यिक/ सांस्कृतिक महाकुंभ एवं स्मृति सम्मान सम्मान समारोह का आयोजन विश्व – बंधुत्व के लिए नेक पहल है। ऐसे कार्यक्रमों से आपसी कटुता – वैमनस्यता में काफी हद तक कमी आ सकती है। संपूर्ण संसार में ऐसे कार्यक्रमों को बढ़ावा देना चाहिए।

मुख्य संरक्षक एवं आयोजन अध्यक्ष डॉ. राम अवतार पाण्डेय एडवोकेट ने कहा कि अभी तो यह कार्यक्रमों की झांकी की गयी है। यथा शीघ्र नेपाल में भी इस तरह का आयोजन किया जाएगा। तत्पश्चात् संसार के अनेकों स्थानों पर बहुभाषीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम के माध्यम से गृहयुद्ध जैसे बन रहे आंतरिक एवं बाहरी के भेदभाव की दुर्भावना को धूलधूसरित करने का प्रयास किया जायेगा।

  नेपाल से आने वाले प्रतिनिधि मंडल के नेतृत्वकर्ता प्रोफेसर, डॉ. हरिप्रसाद तिमिलसिना ने कहा कि हम सब शान्ति और सदभावन के पक्षधर हैं। नेपाल पराधीन सपनेहु सुख नाही, के भावना के साथ विश्व बंधुत्व के लिए संसार में हम सब अपने काव्य,कला के माध्यम से इक दूजे के प्रति प्रेम परस्पर का भाव जागृत करने का प्रयास करेंगे।
  

मुख्य संयोजक/संचालक -कवि इन्द्रजीत तिवारी निर्भीक ने कहा कि भारत -नेपाल साहित्यिक/ सांस्कृतिक महाकुंभ एवं स्मृति सम्मान समारोह के माध्यम से बहुभाषीय कार्यक्रम के द्वारा इक अच्छा भाव देने का हर संभव प्रयास के क्रम में यह आयोजन किये हैं। समय-समय पर करते रहेंगे।
  स्वागत संबोधन -कोलकाता की कवयित्री उषा साह, ईश्वर चन्द जायसवाल मेहदावली एवं राम-लखन वर्मा, धन्यवाद आभार -कवि इन्द्रजीत तिवारी निर्भीक ने किया।

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