चुनाव आयुक्तों की असहमति और बदलावों पर बिफरा विपक्ष ▶विपक्ष ने की ‘ज्ञानेशगेट’ पर सीईसी को हटाने की मांग ▶ निर्वाचन आयोग ने किया मतभिन्नता के मामले का बचाव

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▶विपक्ष ने की ‘ज्ञानेशगेट’ पर सीईसी को हटाने की मांग

▶ निर्वाचन आयोग ने किया मतभिन्नता के मामले का बचाव

हिन्द सन्देश टाइम्स /भाषा, नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर दो निर्वाचन आयुक्तों द्वारा आपत्तियां दर्ज कराए जाने की खबरें सामने आने के बाद बुधवार को बड़ा सियासी बवंडर खड़ा हो गया और विपक्ष ने इसे ‘ज्ञानेशगेट’ करार देते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने तथा उनकी गिरफ्तारी की मांग की। चुनाव आयुक्तों की असहमति और बदलावों को लेकर विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग पर बिफर पड़ी हैं।

दूसरी तरफ, निर्वाचन आयोग ने कहा कि विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग मत होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है तथा उसके सभी फैसले स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप हैं। विपक्ष ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में

मतपत्रों से दोबारा चुनाव कराने की मांग उठाई गई

हाल में हुए विधानसभा चुनावों को रद्द करने और मतपत्रों से दोबारा चुनाव की मांग भी उठाई। दरअसल, अंग्रेजी दैनिक की खबर में दावा किया गया है कि निर्वाचन आयुक्त मुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने देशभर में मतदाता सूची के एसआईआर के दौरान नाम जोड़े और हटाए जाने समेत कई मुद्दों पर आपत्तियां जताई थीं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और निर्वाचन आयोग ने ‘वोट चोरी’ को अंजाम देकर देशद्रोह किया है। उन्होंने कहा कि आगे जरूर न्याय होगा।

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पहले की मतदाता सूची के आधार पर फिर से चुनाव कराने की बुधवार को मांग की। बनर्जी ने साथ ही आरोप लगाया कि भाजपा और निर्वाचन आयोग ने इस साल की शुरुआत में हुए चुनाव को लूट लिया।

ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम करने वाली कठपुतली की भूमिका निभाई है और गृह मंत्री खुद प्रधानमंत्री की इच्छाओं को पूरा करने के लिए शेष पृष्ठ 5 पर…

संवैधानिक संस्था है चुनाव आयोग

आयोग ने कहा कि 10 महीने की अवधि में अलग-अलग आंतरिक नोट या टिप्पणियों को प्रमुखता से सामने रखना और आयोग की मंजूरियों, निर्णयों, निर्देशों तथा पहलों के व्यापक हिस्से को नजरअंदाज करना तस्वीर का केवल एक पक्ष प्रस्तुत करता है। आयोग ने कहा कि वह एक संवैधानिक संस्था है और संविधान के अनुच्छेद 324, वैधानिक नियमों तथा स्थापित संस्थागत परंपराओं के तहत काम करता है। आयोग ने कहा कि वह एक बहुसदस्यीय संवैधानिक निकाय के रूप में कार्य करता है।

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