घुघली/महराजगंज :- घुघली क्षेत्रान्तर्गत ग्राम सभा भुवनी में माँ काली मन्दिर पर चल रहा नौ दिवसीय राम कथा में कथावाचक पंडित चंद्रशेखर रामायणी ने श्रोताओं को राम जन्म की कथा का रसपान कराया श्रोता भाव- विभोर हो उठे और माहौल भक्ति में रहा।
कथावाचक पंडित चंद्रशेखर ने कहा कि पृथ्वी पर जब-जब असुरों का अत्याचार और अधर्म बड़ा तब तक अलग-अलग अवतारों में अवतरित होकर धर्म की स्थापना के लिए अधर्मी असुरों का संहार किया और धर्म की स्थापना किया इस अवतार में भगवान राम ने रावण का संहार किया और धर्म की स्थापना किया।
कथा को प्रारंभ कर जन्म का प्रसंग कहते हुए पहले कथावाचक ने अयोध्या जी की महिमा बताते हुए कहा कि संसार में चार प्रकार के जीव होते हैं। अंडज, स्वदेज, उद्भीद, जरायूज ये सभी जीव अवध में श्री का त्याग करते ही मुक्त हो जाते हैं। सरयू नदी तट पर वसी यह नगरी अति पावन हैं क्योंकि यहां प्रभु ने जन्म लिया।

प्रसंग को आगे बढ़ते हुए कथावाचक ने कहा कि अवध के राजा महाराज दशरथ की उम्र जब 60 हजार वर्ष की हो गई तब उन्हें एक दिन ग्लानि हुआ कि मेरे पास तीन-तीन रानियां हैं लेकिन मुझे अभी तक कोई संतान की प्राप्ति नहीं हुई है। इसी चिंता में महाराज दशरथ ने गुरु वशिष्ठ से कहा तो गुरु वशिष्ठ ने श्रृंगी ऋषि को बुलाकर मनोरम नदी के तट के किनारे मखौड़ा नामक स्थान पर पुत्र कामेष्ठी यज्ञ कराया।यज्ञ संपन्न होने पर स्वयं अग्नि देव प्रकट हुए और प्रसाद के रूप में राजा दशरथ को खीर प्रदान किया खीर को खाने के पश्चात तीनों रानियां ने गर्भधारण किया।
जब प्रभु राम का जन्म होने वाला था तो अयोध्या नगरी में चारों तरफ शुभ शगुन होने लगा शुक्ल पक्ष के नवमी तिथि दिन मंगलवार को पूर्वसु नक्षत्र में माता कौशल्या के गर्भ से दोपहर के समय जन्म लिया एवं माता कैकही से भारत व माता सुमित्रा से लक्ष्मण व शत्रुधन ने जन्म लिया बच्चों के किलकारी सुन महाराज दशरथ परमानंद में डूब गए और बधाई बजाने का आदेश दिया चारों तरफ खुशियों का माहौल हो गया। इस दौरान भजन गायक संजय पाण्डेय एवं सहयोगी हौसला पाण्डेय व कृष्णा पाठक के संगीत मैं भजनों पर भक्तगण भाव- बिभोर हो उठे और राम मय वातावरण हो गया।