कुपोषण के 3995 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषण के है शिकार मुंबई
हिन्द सन्देश टाइम्स
शिव शम्भू सिंह
महाराष्ट्र मायानगरी मुंबई में भी कुपोषण की समस्या बनी हुई है। फरवरी 2025 के लिए एकीकृत बाल विकास परियोजना पोषण ट्रैकर रिपोर्ट के अनुसार, शहरी और
16,420 बच्चे मध्यम रूप से हैं कुपोषित
उपनगरीय क्षेत्रों में 3,925 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित पाए गए हैं। मध्यम कुपोषित बच्चों की संख्या 16,420 है। इससे मुंबई में कुपोषण की हकीकत उजागर हो गई है। केंद्र सरकार की वेबसाइट पोषण ट्रैकर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फरवरी महीने में मुंबई शहर जिले में पंजीकृत बच्चों की संख्या 49,019 है। शहर में स्वस्थ बच्चों की संख्या
43,892 है। मुंबई शहर में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की संख्या 1,038 है, जबकि मध्यम रूप से कुपोषित बच्चों की संख्या 2,963 है। उपनगर जिले में 2,38,094 बच्चे पंजीकृत हैं।
उपनगरों में 2,17,752 बच्चे स्वस्थ हैं। गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की संख्या 2,887 है, जबकि मध्यम रूप से कुपोषित बच्चों की संख्या 13,457 है। पोषण ट्रैकर रिपोर्ट ने एक बार फिर मुंबई में
केवल 8 रुपए में भोजन का पैकेट
एक कटिंग चाय के लिए दस रुपए देने पड़ते हैं, लेकिन सरकार आंगनवाड़ी लाभार्थियों के भोजन के पैकेट के लिए केवल 8 रुपये उपलब्ध कराती है। इसलिए, भोजन की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के संयोजक राजेश सिंह ने कहा कि सरकार को इसकी दरें बढ़ानी चाहिए। एकीकृत बाल विकास परियोजना ने कहा कि दरें बढ़ाना केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र का मुद्दा है।
कुपोषण की समस्या को उजागर किया है।
इसलिए आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ का कहना है कि सरकार को पोषण आहार और अन्य आवश्यक उपायों को लागू करने पर ध्यान देने की जरूरत है। एकीकृत बाल विकास परियोजना विभाग ने स्पष्ट किया है कि कुपोषण की समस्या के समाधान के लिए उपाय किए जा रहे हैं।
कुपोषण को कम करने के लिए 6 महीने से 3 वर्ष की आयु के बच्चों को उनकी माताओं द्वारा नियमित रूप से पौष्टिक भोजन दिया जाता है। 3 से 6 वर्ष के बच्चों को गर्म, ताजा भोजन दिया जाता है। कुपोषण पर काबू पाने के प्रयास जारी हैं। कैलाश पगारे, आयुक्त, एकीकृत चाल विकास परियोजना, महिला एवं बाल विकास विभाग