इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल
महराजगंज जिले के नौतनवा कस्बे से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर संवेदनशील दिल को झकझोर दिया।
एक 14 साल का मासूम राजवीर, पिता की मौत के बाद शव को ठेले पर रखकर श्मशान पहुँचा। उम्मीद थी कि वहां इंसानियत उसे सहारा देगी, मगर श्मशान घाट प्रबंधन ने कह दिया— “लकड़ी लाओ, तभी चिता जलेगी।”
न पैसा था, न सहारा… असहाय बेटा शव लेकर कब्रिस्तान पहुँचा। लेकिन वहाँ भी जगह नहीं मिली।
थक-हारकर, आंसुओं से भरी आँखों के साथ, वह बच्चा सड़क पर लकड़ी के लिए भीख माँगने लगा।
सोचिए… एक मासूम बेटा, पिता की चिता जलाने के लिए दर-दर भटक रहा था।
इसी बीच कुछ मुस्लिम युवक वहाँ से गुजरे। बच्चे की हालत देख उनका दिल पिघल गया।
उन्होंने तुरंत लकड़ी खरीदी, चिता सजाई और पूरे विधि-विधान से पिता का अंतिम संस्कार कराया।
रात 11 बजे तक वे बच्चे के साथ खड़े रहे और उसे अकेला महसूस नहीं होने दिया। साथ ही आगे की ज़िंदगी के लिए आर्थिक सहयोग भी दिया।
इस घटना के बाद पूरे इलाके में चर्चा है—
“श्मशान और कब्रिस्तान ने धर्म-जाति का दरवाज़ा बंद किया, लेकिन इंसानियत ने चिता जलाई।”
यह सिर्फ़ एक कहानी नहीं, बल्कि संदेश है कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है।