रुड़की। एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। तितावी थाना क्षेत्र में कूड़े के ढेर से एक दिन की नवजात बच्ची का शव बरामद हुआ, जिसे आवारा कुत्ते नोच रहे थे। यह हृदयविदारक दृश्य हर संवेदनशील मन को झकझोर देने वाला था।
सूचना मिलते ही तितावी पुलिस मौके पर पहुँची और बच्ची के शव को कब्जे में लिया। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी पर साक्षी वेलफेयर ट्रस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष व समाजसेवी क्रांतिकारी शालू सैनी तत्काल घटनास्थल पर पहुँचीं। जिस मासूम का इस दुनिया में कोई अपना नहीं था, उसके लिए शालू सैनी ने अभिभावक की भूमिका निभाई।
क्रांतिकारी शालू सैनी ने नम आँखों और भारी मन से उस दुधमुंही बच्ची के क्षत-विक्षत शव को संभाला और पूरे विधि-विधान व ससम्मान उसका अंतिम संस्कार कराया। उन्होंने कहा कि “आज शब्द कम पड़ रहे हैं। उस मासूम का कसूर क्या था? अगर उसे इस दुनिया में नहीं रखना था, तो किसी अस्पताल या अनाथालय के पालने में छोड़ दिया जाता। कुत्तों के आगे फेंक देना इंसानियत की सबसे बड़ी हार है। आज हमने सिर्फ एक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया, बल्कि समाज की मर चुकी संवेदनाओं को भी अग्नि दी है।”
उन्होंने समाज के हर नागरिक से भावुक अपील करते हुए कहा कि बेटियों को बोझ न समझें। ऐसी अमानवीय घटना को अंजाम देने के बजाय संस्थाओं से संपर्क करें, ताकि किसी मासूम की जान और उसका सम्मान बचाया जा सके।
गौरतलब है कि क्रांतिकारी शालू सैनी पिछले कई वर्षों से लावारिस और बेसहारा मृतकों के अंतिम संस्कार का कार्य कर रही हैं। अब तक वह करीब छह हजार से अधिक अंतिम संस्कार हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्मों की परंपराओं के अनुसार अपने हाथों से कर चुकी हैं।
अंत में उन्होंने आमजन से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि लकड़ी, घी, कफन, अंतिम संस्कार की सामग्री या एम्बुलेंस—जो भी संभव हो—सहयोग करें, ताकि हर मृतक को सम्मानजनक अंतिम विदाई मिल सके।