महराजगंज जनपद के घुघली थाना क्षेत्र अंतर्गत पोखरभिंडा गांव में बुधवार को कोर्ट के आदेश के बाद भूमि सीमांकन के दौरान पुलिस पर अभद्रता और दबंगई के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला ज्वाला प्रसाद ओझा इंटर कॉलेज के बगल का है, जहां राजस्व विभाग की टीम सीमांकन करने पहुंची थी। मौके पर सुरक्षा के लिए पहुंची पुलिस टीम का नेतृत्व कर रहे एसआई राकेश कुमार यादव पर पोखरभिंड़ा निवासी निर्मला ने अभद्रता, गाली-गलौज और धमकी देने का आरोप लगाया है।
महिला ने लगाया एस आई राकेश कुमार यादव पर आरोप
महिला का आरोप है कि एसआई ने उससे न सिर्फ गाली-गलौज की, बल्कि यहां तक कह डाला कि “रात में मिलो, तुम्हें समझाते हैं”। यह टिप्पणी न सिर्फ अमर्यादित है बल्कि महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भी है। मामला वीरेंद्र व कोटेदार जंगबहादुर के बीच भूमि विवाद से जुड़ा है, जिसकी सुनवाई न्यायालय में हो रही थी। कोर्ट के निर्देश के बाद सीमांकन के लिए राजस्व और पुलिस टीम मौके पर मौजूद थी।
यह है महिला पर ठेस पहुंचाने वाली अमर्यादित भाषा
महिला का आरोप है कि एसआई ने उससे न सिर्फ गाली-गलौज की, बल्कि यहां तक कह डाला कि “रात में मिलो, तुम्हें समझाते हैं”। यह टिप्पणी न सिर्फ अमर्यादित है बल्कि महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भी है। मामला वीरेंद्र व कोटेदार जंगबहादुर के बीच भूमि विवाद से जुड़ा है, जिसकी सुनवाई न्यायालय में हो रही थी। कोर्ट के निर्देश के बाद सीमांकन के लिए राजस्व और पुलिस टीम मौके पर मौजूद थी।
मौके पर मौजूद नायब तहसीलदार विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि कोर्ट के आदेश के अनुपालन में सीमांकन कराया जा रहा है और जिसकी जितनी जमीन होगी, मापी के बाद स्पष्ट हो जाएगा।

रिपोर्टर के साथ भी वर्दी का पवार दिखाया गया
इस दौरान पुलिस की बर्बरता का दूसरा चेहरा तब सामने आया जब दैनिक भास्कर के रिपोर्टर रंजीत मोदनवाल को खबर कवर करने से रोका गया। पुलिसकर्मियों ने न सिर्फ उन्हें कवरेज से रोका, बल्कि जब उन्होंने अपना डिजिटल प्रेस आईडी कार्ड दिखाया तो कहा गया – “हम इसे नहीं मानते, हमारे पास वर्दी है, वर्दी हो तो मानें कि तुम पत्रकार हो।” यह पुलिस की लोकतंत्र में प्रेस की स्वतंत्रता को कुचलने की सोच को दर्शाता है।
ये है पुलिस की मनमानी पत्रकारों को भी धमकी मिल रही है
इतना ही नहीं, पुलिस ने मौके पर लाठियां भी भांजी जिससे भगदड़ मच गई और कई लोग इधर-उधर भागने लगे। यह पूरा घटनाक्रम न सिर्फ पुलिसिया मनमानी को उजागर करता है, बल्कि सवाल खड़ा करता है कि क्या कोर्ट के आदेश की आड़ में पुलिस अब आमजन और पत्रकारों को भी डराने का काम करेगी?
वही इस संबंध मे CO सदर से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो संपर्क नहीं हो पाया