शिवनन्दन मिश्रा
वॉशिंगटन/मॉस्को :- रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात ने अमेरिकी राजनीति में हलचल मचा दी है। इस मुलाकात पर जहां रिपब्लिकन खेमे में इसे कूटनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं डेमोक्रेट्स ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और अमेरिकी विदेश नीति के लिए खतरा करार दिया है।
डेमोक्रेट्स का हमला: “तानाशाह के लिए रेड कार्पेट”
डेमोक्रेटिक नेताओं ने ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने ऐसे समय पर पुतिन से हाथ मिलाया है जब रूस यूक्रेन पर हमले जारी रखे हुए है और हजारों निर्दोष लोग युद्ध की आग में झुलस रहे हैं। सीनेट की डेमोक्रेट सदस्य ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा—
“ट्रंप ने एक ऐसे तानाशाह के लिए रेड कार्पेट बिछा दिया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय मूल्यों की धज्जियाँ उड़ा रहा है।”
यूक्रेन युद्ध का परिप्रेक्ष्य
फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर सैन्य अभियान शुरू करने के बाद से हालात लगातार बिगड़े हैं। अमेरिका और नाटो देश अब तक अरबों डॉलर की मदद यूक्रेन को दे चुके हैं। बावजूद इसके, रूस धीरे-धीरे अपने कब्जे को मजबूत करता जा रहा है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की बार-बार पश्चिमी देशों से और हथियारों व सैन्य सहयोग की मांग कर रहे हैं। वहीं, रूस ने हाल ही में बयान दिया है कि वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
ट्रंप की रणनीति और सियासी असर
ट्रंप 2024 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं और वह बार-बार दावा कर चुके हैं कि अगर वह सत्ता में लौटे तो “24 घंटे में युद्ध खत्म कर देंगे।” उनके पुतिन से मुलाकात को कुछ लोग इसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं।
हालांकि, आलोचक कहते हैं कि ट्रंप की नीतियाँ रूस को और मजबूत कर सकती हैं और यह मुलाकात पश्चिमी सहयोगियों को गलत संदेश भेजेगी।
वैश्विक प्रतिक्रिया
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस बैठक पर निगाहें टिकी हुई हैं। यूरोपीय संघ के कई नेताओं ने अप्रत्यक्ष रूप से ट्रंप की पहल पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि रूस को युद्ध रोकने के बजाय “समान स्तर का मंच” देना, लोकतंत्र समर्थक देशों के बीच अविश्वास पैदा कर सकता है।