महराजगंज। गत दिनों घुघली थाना क्षेत्र के परसा गिदही गांव में रास्ते पर अतिक्रमण करने का मामला थाने पर सर्वसम्मत से निपटारा तो हो गया लेकिन ग्राम प्रधान पति की एकतरफा रवैया व रास्ते के अवरोध का विरोध करने पर हार्ट पीड़िता निधि को विपक्षियों द्वारा धक्का देने से बिगड़ी तबीयत लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग यही कहते फिर रहे हैं कि आखिरकार रास्ता खाली हुआ लेकिन यही काम पहले ही ग्राम प्रधान द्वारा कह कर खाली करा दिया गया होता तो मामला इतना तुल नहीं पकड़ता और हार्ट पेशेंट निधि की हालत नहीं बिगड़ी होती ।खैर रास्ते का बात तो सुलह हो गया लेकिन निधि की तबीयत अभी भी बिगड़ी हुई है वह सहमी हुई हैं।उसका हार्ट का इलाज जारी है।
*आइए जाने क्या था मामला*
मामला घुघली थाने के परसा गिदही गांव का है। गांव के उत्तरी ने गत दिनों शिकायती पत्र के जरिए अपने दरवाजे पर पुस्तैनी जमीन पर ग्रामसभा द्वारा नाली ,खड़ंजा निर्माण जबरन कराने की शिकायत की थी।थानाध्यक्ष ने मामला को गंभीरता से लेकर शिकायतकर्ता को समझाकर रास्ता नाली बनवा दिया था।शिकायतकर्ता स्वेच्छा से जमीन भी दे दिया।लेकिन बाद में ग्राम प्रधान पति के एकतरफा उकसावे वाली राजनीति ने अपनी जमीन देकर रास्ता बनवाने वाले की रास्ता रुकवा दिया।
*सुरक्षा कवच बना डायल 112*
होनी को तो कोई रोक नहीं सकता फिर भी उत्तर प्रदेश पुलिस की डायट 112 कभी-कभी लोगों के लिए सुरक्षा कवच बनकर आती है और उनकी जान बचा देती है।
मामला घुघली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सभा परसा गिदही का है । वहां की रहने वाले शिकायतकर्ता उत्तरी की छोटी बहु निधि ने बताया कि वहां रास्ते का एक विवाद था जिसे थाना अध्यक्ष कुंवर गौरव सिंह के कुशल नेतृत्व ने दोनों पक्षों के बीच समझा बूझकर सुलह कर दिया था । मौके पर रास्ते और नाली निर्माण का भी काम पूरा हो गया था ।उसने बताया कि दूसरे पक्ष ने उनके रास्ते को ईंट सजाकर रोक दिया था। उनकी अचानक गाय बीमार हो गई । तीन दिन से बीमार की दशा में गाय तड़पती रह गई लेकिन दूसरे पक्ष ने रास्ते के सामने रखा ईंट नहीं हटाया। अचानक शनिवार का वह काला दिन आ गया । तड़पती हुई गौ माता मौत को गले लगा लिया। काफी अनुनय विनय के बाद दूसरे पक्ष ने ईंट हटाकर रास्ता खोल दिया।ग्रामीणों के सहयोग से गौ माता की अंतिम विदाई हुई । हद तब हो गई जब उनके घर के पुरुष ग्रामीणों के सहयोग से गाय को दफनाने के लिए ज्यों ही घर से बाहर गए तभी दूसरे पक्ष की सोनमती,कमला महिला व महिमा नामक लड़की ने ईंट रखकर रास्ते को जाम कर दिया। निधि ने बताया गाय की तड़पन व अपनी आंखों के सामने रास्ते अवरोध होते देख घर में रह रही हृदय रोग से पीड़ित वह अपने को नहीं रोक पाई । हालांकि उसके हार्ट का ऑपरेशन दिल्ली एम्स में विगत दिनों हुआ था। डॉक्टर ने उसे शांति से जीवन बिताने की सलाह दी थी लेकिन वह अपनी आंखों के सामने अन्याय नहीं देख सकी । उसके आंखों पर गाय की तड़पन बार-बार कीरोध रही थी । उसने 112 नंबर डायल कर दिया जिस पर पुलिस आ गई है और विरोधी पक्ष को रास्ता खाली करने को कहा लेकिन वे लोग पुलिस के जाने पर रास्ता खाली नहीं किया।तभी ग्राम प्रधान पति जाकर विरोधी पक्ष को उकसा दिया जिसे विरोधी और उग्र हो गए। घूंघट की आड़ से बाहर निकल कर उसने भी इन लोगों को रास्ता ना रोकने की सलाह दी लेकिन तभी सोनमती महिला ने धक्का दे दिया। धक्का उसके सीने पर लगा जिससे वह बेहोश हो गई।ग्रामीणों के सहयोंग़ से उसे प्राथमिकी उपचार दिया गया तथा गाय दफनाने गए परिजनों को इसकी सूचना दी।परिजन आनन फानन में आए और उसे जिला अस्पताल ले गए।चिकित्सकों ने भर्ती करके इलाज किया तथा कार्डियोलॉजिस्ट से दिखाने का सलाह दिया।उसने बताया कि अब वह दिल्ली एम्स जाने की तैयारी में है लेकिन आने के बाद भी यह रहने पर डरी हुई है।
*चर्चा में रही घुघली पुलिस*
परिजनों ने अस्पताल पहुंचकर मामले की जानकारी मोबाइल के जरिए घुघली थाना अध्यक्ष को बताया। थानाध्यक्ष ने सक्रियता दिखाते हुए मौके पर दरोगा को भेजा जिसने समझा बुझाकर रास्ते पर रखा ईट हटा दिया । पुलिस की यह सक्रियता गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस की सक्रियता से ग्राम प्रधान पति की दबंगई ध्वस्त हो गई।
*मामले में प्रधान पति की खेल*
सूत्रों की सही माने तो इस पूरे प्रकरण में ग्राम प्रधान पति का खेल स्पष्टतया दिख रहा है । मामले में जब पुलिस पहुंच रही है वह विरोधी पक्ष को समझने का कार्य कर रही है तो ग्राम प्रधान पति मौके पर पहुंचकर इधर-उधर की बातों में करके पुलिस को गुमराह कर रहा है तथा एक तरफा उसकी बात मामले को तूल पकड़ रहा है इसमें कहीं ना कहीं वोट की राजनीति है।
हालांकि थाना अध्यक्ष की सक्रियता से वर्तमान समय में विरोधी पक्ष द्वारा रास्ता को खाली कर दिया गया लेकिन ग्राम प्रधान पति व विरोधी पक्ष की दबंगई के कारण निधि सहमी हुई है।
*गौ माता की मौत ,शोक में परिजन, ऐन वक्त रास्ता रोकना किस बात का द्वैतक*
करीब एक दशक से अपनी गौ माता के साथ रहने वाला परिवार उसके अंतिम सांस लेने के गम में डूबा हुआ था । परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था। पुरुष वर्ग अपनी गौ माता की अंतिम विदाई में उसे दफनाने गया हुआ था। इस वक्त ग्राम प्रधान पति के आकर सोनमती पत्नी नंदकिशोर यादव व कमला पत्नी स्वर्गीय रामू यादव व महिमा पुत्री नंदलाल यादव को रास्ता रोकने की अचानक क्या जरूरत आ पड़ी। क्या उन लोगों में नैतिकता का पतन हो गया था एक तरफ शोकाकुल परिवार अश्रुवर्षा कर रहा,दूसरी तरफ हृदय रोगसे पीड़ित के सामने उसका रास्ता रोकना,विरोध करने पर धक्का देना किस बात का रास्ता तैयार किया जा रहा।
*चुनावी रंजिश तो नहीं*
ग्राम प्रधान पद की एक तरफ रवैया व दबंगई से सहमा दुबे परिवार कई तरह की अटकलें तलाश रहा है । कही ऐसा तो नहीं पिछले चुनाव में पीड़िता निधि के पति का सदस्य का चुनाव लड़ना तथा जितने का प्रधान प्रतिनिधि बदला तो नहीं ले रहा। वैसा इस गांव में तो खुली बैठक कभी हुई नहीं।न ही इस सदस्य को ग्राम सभा की बैठक में बुलाया गया।
*खबर का विरोध तो नहीं*
समझ में नहीं आ रहा कि आखिरकार यहां का ग्राम प्रधान पति इस दुबे परिवार का इतना विरोध क्यों कर रहा है । उसे परिवार को जीना मुहाल क्यों कर दिया ।एक कारण यह भी समझ में आ रहा है कि पीड़िता निधि के पति करीब दो दशक से पत्रकारिता करते हैं और तीन बार के प्रधानी काल में वह कई बार भ्रष्टाचार की पोल खोलने वाली खबरों को प्रकाशित किया था
निधि की जेठ मार्कण्डेय द्विवेदी भी एक पत्रकार हैं। जिन्होंने गत दिन स्वतंत्रता दिवस पर साफ सफाई वह ब्लीचिंग पावडर छिड़काव इंडिया मार्क हैंडपंप मरम्मत के नाम पर करीब 42000 का घोटाला करने का खबर छापा था। कहीं ऐसा तो नहीं ग्राम प्रधान पति उसी के नाते खार खाया हुआ है ।जो भी है लेकिन परिवार सहमा हुआ है।
आखिरकार थानाध्यक्ष की सक्रियता के कारण रास्ता खाली कराया गया तथा दोनों पक्षों में सुलह कराकर या सर्वसम्मत से तय हुआ दोनों पक्ष उस रास्ते पर आवागमन कर सकता है । खैर मामला तो हल हो गया लेकिन निधि अभी भी डिप्रेशन में है तथा सहमी हुई है। उसके हार्ट का इलाज जारी है।