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नशे की ओर जाता दिख रहा युवा वर्ग आशियाना भविष्य इनका खतरे मे

खड्डा कुशीनगर
शिव शंभू सिंह

आज के कुछ वर्ष पहले युवाओं को शिक्षा का नशा था शिक्षित होना जरूरी है लेकिन आज का युवा वर्ग नशे की तरफ कदम बढ़ा चुका है
आज का युवा एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या है। नथा का मतलब है किसी भी प्रकार के मादक पदार्थ का सेवन करना, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। आज के युवा अलग-अलग तरह से नशे की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जैसे कि तनाव, दबाव, उत्सुकता, सामाजिक प्रभाव मां बाप के सपनों पर सीधा पानी फेरने का काम कर रहे हैं या नशेड़ी कभी-कभी तो नशे के मदहोस में बड़ी-बड़ी घटनाओं का अंजाम दे देते हैं इसी तरह एक तरह से माना जाए तो क्राइम भी बढ़ता जा रहा है आई इसके बारे में जानते हैं कुछ और नशा मुक्ति भारतीय समाज की एक विडम्बना है। निम्न स्तर के लोग अक्सर अपने दैनिक काम के पैसे शराब पीने में लगा देते है। अगर वह पैसे अपने बच्चो की शिक्षा में इस्तेमाल करें तो उनका भविष्य उज्जवल हो सकता है। दुखद रूप से ऐसा कदापि नहीं होता, दो पल के सुख और मज़े के लिए इंसान अपना सब कुछ गवां देता है। प्रेम सम्बन्धी में धोखा मिलने पर युवा और कई तरह के लोग नशे के लत में डूब जाते है। इसके दुष्परिणाम इंसान को ही झेलने पड़ते है।

नशे की शुरुआत पहले मज़े और मित्रों के साथ जश्न से होती है। धीरे धीरे इंसान नशे की अन्धकार जाल में फंसता चला जाता है और अंततः उससे कभी निकल नहीं पता। वह अपने जीवन के सारे लक्ष्य को भूलकर एक नसेड़ी जीवन की तरफ अग्रसर हो जाता है। नशे के कारण इंसान सही और गलत का फर्क भूल जाता है और अपने परिवार से मानसिक और जज़्बाती तौर पर कोसों दूर चला जाता है। जो लोग नशे की लत में पड़ जाते है, उन्हें लगता है की नथा करके उनके सारे दुखों पर पूर्णविराम लग जायेगा। लेकिन वास्तविक में यह सोच अत्यंत गलत है। लोग अपने दुखों को भुलाने के लिए शराब का सहारा लेते है जिसमें न उनका भला होता है न परिवार का न समाज का। अत्यधिक शराब के सेवन से इंसान का लिवर खराब हो सकता है और सिगरेट, तम्बाकू से कैंसर जैसी भयानक बीमारियां उत्पन्न होता है। ज़िन्दगी में मनुष्य को खुशियां और ज्ञान बाटना चाहिए न की नथा। हेरोइन और कई तरह के ड्रग्स इंसान को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से कंगाल बना देता है। अभी कई तरह के नशा मुक्ति सेंटर है जो नशे से पीड़ित लोगों का चिकित्सा करते है। कई लोग इन नशा मुक्ति सेंटर में आकर नशे की लत का त्याग कर चुके है जो काफी अच्छी बात है। डॉक्टर्स मरीज़ को नशा जैसे शराब और सिगरेट से आजीवन दूर रहने की सलाह देते है। लोगों को अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण रखना होगा ताकि वह नशे जैसी चीज़ों से बाहर निकलकर अपने लिए और अपनों के लिए एक नए भविष्य का निर्माण कर सका नशा मुक्ति भारतीय समाज की एक विडम्बना है। निम्न स्तर के लोग अक्सर अपने दैनिक काम के पैसे शराब पीने में लगा देते है। अगर वह पैसे अपने बच्चो की शिक्षा में इस्तेमाल करें तो उनका भविष्य उज्जवल हो सकता है। दुखद रूप से ऐसा कदापि नहीं होता, दो पल के सुख और मज़े के लिए इंसान अपना सब कुछ गवां देता है। प्रेम सम्बन्धो में धोखा मिलने पर युवा और कई तरह के लोग नशे के लत में डूब जाते है। इसके दुष्परिणाम इंसान को ही झेलने पड़ते है।

आजकल युवा वर्ग और कई व्यस्क लोग भी सिगरेट या शराब का सेवन करते हुए नज़र आते है। उन्हें यह समझ नहीं आता की यह उनके लिए आगे चलकर हानिकारक और जानलेवा साबित हो सकती है। युवा वर्ग के लिए नशा एक फैशन बन गया है। भारत में शराब और सिगरेट के निर्यात की वजह से करोड़ो रुपये मिलते है। लेकिन फिर भी सिगरेट के पैकेट्स पर नो स्मोकिंग लिखा रहता है। फिर भी रोज 17 साल के लड़की और लड़के इसका भरपूर सेवन करते है। धूम्रपान या शराब का सेवन स्वस्थ के लिए हानिकारक होता है। यह जानकार भी लोग इसका सेवन करने से बाज़ नहीं आते। तम्बाकू, खैनी और गुटखा से माउथ कैंसर हो सकता है। कई सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान करना मना होता है। मगर कुछ मनचले लोग किसी की सुनते नहीं है। किसी भी देश का भविष्य और देश की तरक्की देश के युवाओं पर टिकी होती है। देश की युवा पीढ़ी अगर गलत रास्ते चले जाए तो निश्चित तौर पर उनका जीवन अंधकार में चला जाता है। देश का युवा वर्ग को ज़िन्दगी के हर पहलु को जीने की इच्छा होती है। युवा वर्ग नशे को अपनी शान समझते है। युवा वर्ग शराब, गुटखा, तम्बाकू, बीड़ी, सिगरेट का नशा करते है। उनकी जश्न की पार्टी

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