30 दिन की देरी, बिना पत्रांक-दिनांक का जवाब और 3000 रुपये की मांग, लक्ष्मीपुर ब्लॉक फिर सवालों के घेरे में

उत्तर प्रदेश महराजगंज

महराजगंज। लक्ष्मीपुर विकास खंड की ग्राम पंचायत पैसिया उर्फ कनघुसूरी में सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जनसूचना को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। आरोप है कि आवेदन दिए जाने के लगभग 30 दिन बाद आवेदक को ऐसा पत्र भेजा गया, जिसमें न तो कोई पत्रांक अंकित है और न ही जारी करने की दिनांक, जबकि उसी पत्र में सूचना की छायाप्रति उपलब्ध कराने के नाम पर 3000 रुपये ग्राम निधि के खाते में जमा करने का निर्देश दिया गया है। मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त पत्र के अनुसार, ग्राम पंचायत पैसिया उर्फ कनघुसूरी निवासी विजय नाथ पांडेय ने वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026 तक कराए गए विकास कार्यों से संबंधित जनसूचना मांगी थी। इसके जवाब में भेजे गए पत्र में कहा गया है कि केंद्रीय एवं राज्य वित्त आयोग से कराए गए कार्यों की आय-व्यय संबंधी जानकारी ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर उपलब्ध है तथा मनरेगा के तहत वर्ष 2024 से अब तक कोई भुगतान नहीं हुआ है।
पत्र के तीसरे बिंदु में लिखा गया है कि छायाप्रति शुल्क के लिए 3000 रुपये ग्राम निधि के भारतीय स्टेट बैंक स्थित खाते में जमा कर उसकी रसीद ग्राम पंचायत कार्यालय में प्रस्तुत करें। लेकिन इस पूरे पत्र में कहीं भी पत्रांक और दिनांक का उल्लेख नहीं है, जिसे लेकर इसकी आधिकारिक वैधता पर सवाल उठ रहे हैं।
आवेदक का कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित समय सीमा के भीतर सूचना उपलब्ध कराई जानी चाहिए। यदि अतिरिक्त शुल्क लिया जाना है, तो उसकी सूचना भी विधिवत पत्रांक, दिनांक और स्पष्ट गणना के साथ दी जानी चाहिए। ऐसे में बिना पत्रांक और दिनांक वाले पत्र के माध्यम से धनराशि जमा कराने का निर्देश संदेह पैदा करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रत्येक सरकारी पत्र पर पत्रांक और दिनांक अंकित होना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसके अभाव में यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि पत्र कब जारी किया गया और उसका आधिकारिक रिकॉर्ड क्या है। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि 3000 रुपये की राशि किस आधार पर निर्धारित की गई और कितने पृष्ठों की प्रतिलिपि के लिए यह शुल्क मांगा गया।
मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर जारी है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरणई की निष्पक्ष जांच कराने तथा यह स्पष्ट करने की मांग की है कि बिना पत्रांक और दिनांक के जारी किए गए पत्र के आधार पर शुल्क जमा कराने का निर्देश किस नियम के तहत दिया गया। उपरोक्त के संदर्भ में खंड विकास अधिकारी लक्ष्मीपुर से बात किया गया तो उनका कहना है कि इसमें तो कही दिनांक या किस कार्यालय से पत्र जारी हुआ है तथा रुपया जमा करने के लिए कौन सी शाखा तथा कितने प्रति कापी कही दर्शाया ही नहीं गया है आप इस पत्र को वापस कर दीजिए

 

                              (रिपोर्ट विजय नाथ पांडे)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *