गोरखपुर माघ मास की गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं धर्मवेत्ता पंडित अजीत पाठक ने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएँ देते हुए देवी उपासना के महत्व पर सारगर्भित सुविचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गुप्त नवरात्रि साधना, तप और आत्मशुद्धि का विशेष पर्व है, जिसमें मां दुर्गा के दस महाविद्या स्वरूपों की आराधना से साधक को अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
पंडित अजीत पाठक ने अपने संदेश में कहा कि “माघ गुप्त नवरात्रि में की गई सच्ची साधना जीवन के सभी कष्टों को दूर कर आत्मबल, विवेक और सकारात्मकता प्रदान करती है। इस समय किया गया जप, ध्यान और व्रत विशेष फलदायी होता है।” उन्होंने यह भी बताया कि नवरात्रि केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर छिपी नकारात्मक प्रवृत्तियों को त्यागकर सद्गुणों को अपनाने का पर्व है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि नवरात्रि के दौरान संयम, सात्त्विक आहार, सत्य वचन और सेवा भाव को अपने जीवन में अपनाएं। पंडित अजीत पाठक के अनुसार, “जब मन, वचन और कर्म शुद्ध होते हैं, तभी देवी कृपा पूर्ण रूप से प्राप्त होती है।”
गुप्त नवरात्रि के अवसर पर उनके इन प्रेरणादायक सुविचारों से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया। धार्मिक आयोजनों, पूजा-अर्चना और साधना के माध्यम से वातावरण भक्तिमय बना रहा। क्षेत्र के लोगों ने पंडित अजीत पाठक के विचारों को मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि ऐसे संदेश समाज में आध्यात्मिक चेतना और नैतिक मूल्यों को मजबूत करते हैं।
माघ गुप्त नवरात्रि के इस पावन अवसर पर पंडित अजीत पाठक ज्योतिषाचार्य के सुविचार श्रद्धालुओं के लिए आस्था, विश्वास और आत्मबल का संबल बने हुए हैं।